राजेश खन्ना के साथ फिल्म 'आनंद', 'मिस्टर इंडिया' और 'जॉली एलएलबी' जैसी 280 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके गुजरे जमाने के शानदार अभिनेता () ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 30 जनवरी 1929 को जन्मे रमेश ने हिन्दी ही नहीं बल्कि मराठी फिल्मों और मराठी ड्रामा में खूब अदायगी दिखाई है और फैन्स की वाहवाही पाई है। रमेश देव का जन्म अमरावती महाराष्ट्र में हुआ था, लेकिन उनके पूर्वजों का कनेक्शन जोधपुर राजस्थान से रहा है। रमेश देव के पिता कोल्हापुर में जज के पद पर कार्यरत थे। आपको जानकर हैरान होगी कि रमेश देव के दादा और परदादा को जोधपुर पैलेस से लेकर कोल्हापुर शहर के निर्माण तक के लिए याद किया जाता है। उनके पूर्वज बाद में कोल्हापुर में ही शिफ्ट हो गए। उनके दादा और परदादा दोनों भी पेशे से इंजीनियर हुआ करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने ही जोधपुर पैलेस भी बनवाया था। कहा जाता है कि उन्हें छत्रपति शाहू महाराज ने उन्हें कोल्हापुर शहर के निर्माण के लिए बुलावा भेजा था। रमेश देव के दादा जी शाहू महाराज के यहां चीफ इंजीनियर के तौर पर पहुंचे थे और उनके पिता लीगल अडवाइजर थे। रमेश देव अपने पिता और दादाजी से अलग फिल्मों की दुनिया की तरफ आकर्षित थे। साल 1951 में उन्होंने मराठी फिल्म 'पतलाची पोर' से डेब्यू किया जो बस एक कैमियो रोल था। इसके बाद वह Andhala Magto Ek Dola से मराठी फिल्मों में काम करना शुरू किया। उन्होंने विलन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। रमेश देव की पहली हिन्दी फिल्म राजश्री प्रॉडक्श में बनी फिल्म 'आरती' थी। रमेश देव और सीमा देव (जिन्हें पहले नलिनी सराफ के रूप में जानते थे) ने कई फिल्मों में साथ काम किया है। इन दोनों की कई फिल्मों को खूब सराहा गया। 1962 में, उन्होंने फिल्म 'वरदक्षिणा' में साथ काम किया। इसी फिल्म के दौरान दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया। बाद में उन्होंने बिना देर किए उसी साल शादी कर ली। रमेश देव और सीमा देव के बेटे अजिंक्या देव मराठी फिल्मों के जाने-माने ऐक्टर हैं और दूसरे बेटे अभिनय देव फेमस फिल्म डायरेक्टर जिन्होंने 'डेल्ही बेली' जैसी फिल्में बनाई हैं। रमेश देव ने अपने करियर में 285 से अधिक हिन्दी फिल्में कीं और तकरीबन 190 मराठी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। ऐक्टिंग से प्यार करने वाले रमेश ने करीब 30 मराठी ड्रामों में भी नजर आ चुके हैं। उन्होंने कई फीचर फिल्में, टेलिविजन सीरीयल और ऐड फिल्में प्रड्यूस की हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों, डॉक्युमेंट्री और टीवी सीरियलों का निर्देशन भी किया। उन्हें अपने काम के लिए कई स्टे और नैशनल अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। रमेश ने अपने करियर में कई शानदार फिल्में की हैं, जिनमें आज़ाद देश के गुलाम, घराना, सोने पे सुहागा, गोरा, मिस्टर इंडिया, कुदरत का कानून, दिलजला, शेर शिवाजी, प्यार किया है प्यार करेंगे, इलज़ाम, पत्थर दिल, हम नौजवान, कर्मयुद्ध, गृहस्थी, मैं आवारा हूं, तकदीर, श्रीमान श्रीमती, दौलत, अशान्ति, हथकड़ी, खुद्दार, दहशत, बॉम्बे ऐट नाइट, हीरालाल पन्नालाल, यही है ज़िन्दगी, फकीरा, आखिरी दांव, सुनहरा संसार, ज़मीर, एक महल हो सपनों का, सलाखें, 16 घंटे, प्रेम नगर, गीता मेरा नाम, कोरा कागज़, कसौटी, जैसे को तैसा, ज़मीन आसमान, जोरू का गुलाम, बंसी बिरजू, यह गुलिस्तां हमारा, हलचल, मेरे अपने, संजोग, बनफूल, आनन्द, दर्पण, खिलौना, जीवन मृत्यु, शिकार, सरस्वतीचन्द्र, मेहरबां आदि शामिल हैं।
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