Monday, November 22, 2021

अजय देवगन के 30 साल, बोले- दो मोटरसाइकिल पर खड़े होकर एंट्री के वक्‍त पेट में हो रही थी गुड़गुड़ी

(Ajay Devgn) ने साल 1991 में दो मोटरसाइकिल ()पर सवार होकर बॉलिवुड में डेब्‍यू किया था। ऐक्‍शन डायरेक्‍टर वीरू देवगन के बेटे की '' () में एंट्री हुई तो सिनेमाघरों में स‍ीटियां गूंज गईं। बड़े पर्दे पर उसका सुपरस्‍टार मिला। बीते 30 साल से अजय की एंट्री और फिल्‍मों पर सिनेमाघरों में सीटियों और तालियों का यह दौर जारी है। इन 30 साल में अजय देवगन (30 years of ) ने न सिर्फ ऐक्‍शन से, बल्‍क‍ि इमोशनल किरदारों में भी अपने आप को साबित किया। 'जख्‍म' के लिए उन्‍हें नैशनल अवॉर्ड मिला। लेकिन आज भी इस सुपरस्‍टार के दिल के कोने में 'फूल और कांटे' के एंट्री सीन की वो यादें ताजा हैं। अजय कहते हैं, 'मैं नर्वस था, पेट में गुड़गुड़ी हो रही थी।' 'बहुत मुश्‍क‍िल है स्‍टारडम को बनाए रखना'इंडस्‍ट्री में अपनी पहचान बनाने से ज्‍यादा मुश्‍क‍िल है, तीन दशक से उस स्‍टारडम को बनाए रखना। 'हिंदुस्‍तान टाइम्‍स' को दिए इंटरव्‍यू में अजय कहते हैं, 'आप सही कह रहे हैं। शोबिज में 30 साल तक खुद को बनाए रखना बहुत कठिन है। इसके लिए समय के साथ खुद को बेहतर बनाना और मैच्‍योरिटी दिखानी जरूरी है। इसके लिए काम के साथ लगातार प्रयोग करना पड़ता है। अपने हर सहयोगी और फिल्म निर्माता से बारीकी सीखने की जरूरत है। यह कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है। मेरा मतलब कहीं से भी नंबर-1 या नंबर-2 होना नहीं है। मेरे कहने का अर्थ है कि आपको अपनी क्राफ्ट का मकसद खुद ढूंढ़ना होगा।' 'पिता के सपने को पूरा करने आया था' बॉलिवुड में अजय देवगन ने 'फूल और कांटे' से डेब्‍यू किया था। अजय कहते हैं, 'सच कहूं तो मुझे ऐक्‍टर बनाने का सपना मेरे पिता ने देखा था। मैं बस उनके सपने को साकार करने के लिए आया। तब यह नहीं सोचा था कि मैं सक्‍सेसफुल हो पाऊंगा या नहीं। हां, मैंने उस मौके को लेकर लापरवाह नहीं था। मैंने वही किया जो मुझसे करने को कहा गया था। कोई भी अपने स्‍टारडम को प्‍लान नहीं कर सकता है। इसके लिए आपको कड़ी मेहनत करनी होगी।' 'मैं तब स्‍टारडम के लिए तैयार नहीं था'अजय आगे कहते हैं, 'जब 'फूल और कांटे' का क्रेज बन गया, तब मैं मुझमें स्टारडम की ललक जगी। तब देश का हर लड़का दो मोटरसाइकिलों पर खड़े होने अपने जीवन की राह बनाना चाहता था। सच तो यह है कि मैं तब मैच्‍योर नहीं था। यंग था। मैं स्टारडम के लिए तैयार नहीं था। मेरे माता-पिता के आशीर्वाद से, भगवान की कृपा से और इंडस्‍ट्री के साथ-साथ फैन्‍स के प्‍यार ने मुझे एक स्टार बनाया।' 'वह सच में पागलपन था'जब अजय देवगन से पूछा गया कि 'फूल और कांटे' में एंट्री सीन को लेकर 30 साल बाद अब कुछ याद है? ऐक्‍टर ने कहा, 'मुझे उस वक्‍त का अनुभव ठीक-ठीक तो याद नहीं, लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर सीन करना पागलपन था। मैं नर्वस था। मेरे पेट पर गुड़गुड़ी हो रही थी। आज भी होती है, जब मैं किसी ऐसे सिचुएशन में होता हूं तो। मुझे याद है कि तब बॉडी डबल नहीं होते थे। ऐक्‍टर के तौर पर हमें ही सीन को शूट करना होता था। वह मेरे पिता का मुझ पर और मेरे साहस पर भरोसा था। इसलिए वह सीन शूट हो पाया।' 'मैं बुरी तरह थक जाता था''फूल और कांटे' से जुड़ी यादें साझा करते हुए अजय देवगन कहते हैं, 'फिल्‍म के सेट पर की यादें थोड़ी धुंधली हो चुकी हैं। मेरे निर्देशक कुकू कोहली ने मधु शाह और मुझे दोनों न्‍यूकमर्स को कास्‍ट किया था। उन्होंने उस दौर के सबसे बेहतरीन म्‍यूजिक डायरेक्‍टर नदीम और श्रवण को चुना। मेरे पिता को ऐक्शन कोरियोग्राफी के लिए लिया। फिल्‍म में अमरीश पुरी जैसे दिग्गज ऐक्‍टर थे। मैं उस वक्‍त इंडस्‍ट्री के लिए कच्चा था, मेरे पिता ने मुझसे जिस तरह के ऐक्‍शन सीन करवाए, मैं बुरी तरह थक जाता था। मेरा यकीन मानिए, उन्‍होंने मेरे लिए किसी ऐक्‍शन सीन को आसान नहीं बनाया। बल्‍क‍ि उन्‍होंने और कठ‍िन सीन कोरियोग्राफ किए, क्‍योंकि उन्‍हें विश्‍वास था कि मैं यह कर सकता हूं।'


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