मुंबई में हजारों झुग्गियों और घनी आबादी के इलाके में कोरोना के कारण बुधवार को एक मरीज की हुई मौत के बाद यहां हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल, सांस लेने में तकलीफ के बाद इस मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया था। साथ ही उसके परिवार के सभी सदस्य क्वारंटीन कर दिए गए थे। बता दें कि ऑस्कर विजेता फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' की ज्यादातर शूटिंग इसी स्लम इलाके में हुई थी। यही नहीं इन झुग्गियों के कई किरदार फिल्म का हिस्सा बने थे। बता दें कि वर्ष 2008 में ब्रिटिश डायरेक्टर डैनी बॉयल ने अपनी इस ऑस्कर विनिंग फिल्म के लिए मुंबई के इसी स्लम क्षेत्र से कई बच्चों को अपनी फिल्म में कॉस्ट किया था। इस फिल्म के जरिए मुंबई के झुग्गियों की हकीकत पूरी दुनिया के सामने आई थी। इसके बाद से तमाम संगठनों ने इनकी मदद के लिए हाथ भी बढ़ाए। हालांकि बाद में हालात फिर वही हो गए। ...और फिल्म के बाद बदली थी जिंदगी फिल्म की कहानी ही मुंबई के इस स्लम में पैदा हुए दो भाइयों की कहानी है, जिसमें से एक भाई जमाल बड़े होने पर 'कौन बनेगा करोड़पति' शो का हिस्सा बनता है और रातोंरात उनके परिवार की किस्मत बदल जाती है। फिल्म में तो इनकी किस्मत बदलती ही है। वास्तविक जीवन में भी डैनी बॉयल ने एक ट्रस्ट बनाकर इन बच्चों की जिंदगी बदल दी। दरअसल, इस फिल्म का गाना 'जय हो' काफी हिट हुआ था। बॉयल ने इसी नाम से ट्रस्ट बनाया और इन बच्चों को स्लम से निकालक एक बेहतर फ्लैट में पहुंचाया, जहां से इनकी जिंदगी भी बदली। हालांकि बाद में यह भी हुआ इसके बावजूद बाद में यह भी सामने आया कि फिल्म के कुछ किरदार फिर स्लम में रहने को मजबूर हुए। अगर अजहर का किरदार आपको याद हो तो बता दें कि उसे बॉयल की कॉस्टिंग टीम ने इसी स्लम में ही देखा था। उसके बाद उन्हें कई और किरदार इस स्लम एरिया से ही मिले। कभी ऑस्कर जीत फिल्म ने मचाई थी धूम और फिर वह हुआ जो शायद इन बच्चों ने सपनों में भी नहीं सोचा होगा। जो बच्चे कभी ट्रेन तक में सफर नहीं किए थे वे हवाईजहाज से अकैडमी अवॉर्ड में हिस्सा लेने अमेरिका गए। यह फिल्म ऑस्कर में छा गई थी। उस साल इस फिल्म ने कुल 8 श्रेणियों में पुरस्कार अपने नाम किए। इसमें बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट अडाप्टेड स्क्रीनप्ले अवॉर्ड भी शामिल रहे। इसी फिल्म के जरिए एआर रहमान ने बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग का अवॉर्ड भी जीता था। अब यह एरिया कोरोना के कारण चर्चा में आज यह स्लम एरिया फिर चर्चा में है। पर, इस बार चर्चा कोरोना मरीज के मौत के कारण है। मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियां और चॉल में यह वायरस तेजी से फैल रहा है और यहां पर इसे काबू पाना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है। इस वायरस को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग सबसे अहम है और इन घनी बस्तियों में यह संभव नहीं हो पा रहा है। अब तक बस्तियों में आठ लोगों को कोरोना पॉजिटिव हो चुका है।
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