from Bollywood News in Hindi, बॉलीवुड न्यूज़, Hindi Movies News, हिंदी मूवीज़ समाचार, फिल्मी खबरें | Navbharat Times https://ift.tt/2SowFAN
via IFTTT
केंद्र सरकार ने ‘अनलॉक 5.0’ की घोषणा करते हुए 15 अक्टूबर से सिनेमाघरों को खोलने की इजाजत भी दे दी है। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक देशभर के सिनेमाघर पहले रोहित शेट्टी, राजकुमार हिरानी, अमिताभ बच्चन और क्रिस्टोफर नोलन की फिल्में रिलीज करेंगे। नए कंटेंट के तौर पर दीपावली के आसपास से सूर्यवंशी, लक्ष्मी बम, कुली नंबर 1 जैसी फिल्मों को पहले रिलीज किया जाएगा।
ट्रेड एनालिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल ने कहा, 'सिनेमाघर संचालकों को 15 दिन का समय मिल गया है। लिहाजा इस पीरियड में वो अपनी प्रॉपर्टी की साफ सफाई, सैनिटाइज आदि कर लेंगे। 50 प्रतिशत सीटों की ही अनुमति है तो उनमें कैसे सीटिंग होनी है, वे सब तैयारियां हो जाएंगी।'
पुरानी फिल्मों से होगी शुुरुआत
आगे उन्होंने कहा, 'थिएटर खुलने के बाद शुरूआत छोटे बजट वाली पुरानी फिल्मों से होंगी। खासकर जो छोटे सेंटर्स हैं, वहां ‘धूम’, ‘गोलमाल’, ‘मुन्नाभाई’ टाइप की जो पिक्चरें हैं, वे रिलीजें होंगी। ‘हेराफेरी’ जैसी फिल्में भी सिनेमाघर वाले डिस्ट्रीब्यूटरों से राइट्स लेकर रिलीज करेंगे।'
'हाल के महीनों में ओटीटी पर आई फिल्में जैसे ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ से लेकर ‘गुलाबो सिताबो’, ‘इंग्लिश मीडियम’ भी यहां रिलीज हो सकती हैं। मगर ये सब एकाध शो में रिलीज से शुरू करेंगे। थाह लेने की कोशिश करेंगे कि लोग इन फिल्मों को बड़े पर्दे पर देखना चाहेंगे क्या।'
सिनेमाघरों को मिलेगी पूरी मदद
जानकारों का कहना है कि सिनेमाघर वालों की चौतरफा मदद होगी। ना सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर, बल्कि प्रोजेक्टर में सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाली यूएफओ जैसी कंपनियां भी सहायता को राजी हैं। वो प्रोड्यूसरों से वसूली जाने वाले वचुर्अल प्रिंट फीस में कटौती करेंगे। उसके चलते प्रोड्यूसर सिनेमाघर संचालकों से कम रकम वसूलेंगे।
रिलिज्ड, डब्ड और रीजनल लैंग्वेज वाली फिल्मों से सिनेमाज ओपन होंगेः कोमल नाहटा
ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के शब्दों में 'शुरू में तो रिलिज्ड, डब्ड और रीजनल लैंग्वेज वाली फिल्मों से सिनेमाज ओपन होंगे। छोटी फिल्मों को भी रिलीज किया जाएगा। जाहिर तौर पर ‘सूर्यवंशी’ दिवाली से पहले तो आएगी नहीं। ‘83’ क्रिसमस से पहले नहीं आएगी। साथ में दीपावली से एक महीने पहले तक ये अंदाजा भी हो जाएगा कि ऑडियंस किस तादाद में सिनेमाघरों में आ रही है।'
फिलहाल सबका मकसद सिर्फ एक है
आगे उन्होंने कहा, 'ऐसे में 15 अक्टूबर से दीपावली तक के वक्त में ‘बागी 3’ और ‘इंग्लिश मीडियम’ के अलावा हॉलीवुड से 'टेंनेंट', 'मुलान' आदि की रिलीज मुमकिन है। यह भी संभव है कि 'टेनेंट' का हिंदी वर्जन ही सिर्फ रिलीज हो। सबका मकसद एक है, किसी तरह काम फिर से शुरू हो। कमाई का कोई नहीं सोच रहा है। लोगों को वापस सिनेमाघर आने की आदत डलवाने पर जोर होगा।'
यशराज की भी कुछ फिल्में तैयार हैं
'रिवाइज्ड टर्म्स पर फिल्में रिलीज होंगी। यशराज की भी कुछ फिल्में रेडी हैं तो उन्हें भी लिया जा सकता है। सलमान वगैरह भी दीपावली तक के पीरियड पर नजर रखेंगे। चूंकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु में 30 अक्टूबर तक बंद है। हिंदी फिल्मों के लिहाज से महाराष्ट्र बड़ी टेरेटरी है, तो यह पहलू भी देखना दिलचस्प होगा।'
डिस्ट्रीब्यूटर्स सिनेमाघरों से कुछ एडवांस नहीं मांग रहेः कुमार आदर्श
सिंगल स्क्रीन बिरादरी से इंडियन स्टैंडअलोन सिने थिएटर गिल्ड फाउंडर के जनरल सेक्रेटरी कुमार आदर्श ने कहा, 'हम लोग ‘गुलाबो सिताबो’, ‘इंग्लिश मीडियम’ जैसी पिछली पहले से ही रिलीज हो चुकी फिल्मों से शुरू करेंगे। सिंगल स्क्रीन वालों को प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से सहायता के पूरे आश्वासन मिले हैं। वे सिनेमाघर वालों से कोई एडवांस पैसा डिमांड नहीं कर रहे हैं। नए कंटेंट के तौर पर पूरा भरोसा है कि ‘खाली-पीली’, ‘लक्ष्मी बम’, ‘कुली नंबर 1’ भी सिनेमाघरों में रिलीज रहने की पूरी संभावना रहेगी।'
सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जांच कर रही सीबीआई अब इस केस में आईपीसी (मर्डर) की धारा 302 को जोड़ने पर विचार कर रही है। एम्स की टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट सबमिट कर दी है जिसके बाद सीबीआई केस के दूसरे चरण की जांच शुरू करने वाली है। इसके अलावा सुशांत के मैनेजर रहे सिद्धार्थ पिठानी के भी सरकारी गवाह बनने की संभावना है।
एम्स की रिपोर्ट में सामने आए तीन बड़े सवाल
कूपर हॉस्पिटल में जल्दबाजी में किए सुशांत के पोस्टमॉर्टम पर एम्स की टीम ने 3 बड़े सवाल उठाए हैं। डॉ. सुधीर गुप्ता के अनुसार-
इसके अलावा पहले यह खबर भी सामने आई थी कि विसरा को सही ढंग से सुरक्षित नहीं किया था, जिसके कारण एम्स की टीम को जांच में परेशानी आई।
नया दावा मौत से पहले सुशांत से मिली थी रिया
इसके अलावा एक चश्मदीद ने इस बात का दावा किया है कि सुशांत की मौत से ठीक एक दिन पहले यानी 13 जून को रिया उनसे मिली थीं। यह कहना है विवेकानंद गुप्ता का। चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि चश्मदीद ने उनसे कहा कि रिया 13 जून की रात करीब 2 से 3 बजे के आस-पास सुशांत से मिली थी। बाद में सुशांत उसे घर छोड़ने भी गए थे। ऐसे में रिया का यह कहना कि उसने सुशांत का घर 8 जून को छोड़ दिया था, पूरी तरह झूठ है।
हालांकि इस बात की पक्की जानकारी भी पिठानी के ही पास है क्योंकि सुशांत की मौत से एक दिन पहले उनके घर आने वाले लोगों के बारे में पिठानी ही जानता है।
सिद्धार्थ और नीरज बन सकते हैं गवाह
रिपब्लिक की रिपोर्ट के अनुसार सिद्धार्थ पिठानी सीबीआई के अधिकारियों की निगरानी में है। अधिकारियों का कहना है कि वह गवाह बन सकता है। उससे कई बार पूछताछ और बयान रिकॉर्ड किया जा चुका है। अगली पूछताछ के लिए वह दिल्ली जा सकता है। सिद्धार्थ के अलावा कुक नीरज भी गवाह बन सकता है।
कोरोना लॉकडाउन के कारण बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग रुक गई थी और स्टार्स भी शूट करने से बच रहे थे। हालांकि,अब स्टार्स भी कोरोना वायरस के साथ जीवन जीना सीख रहे हैं और शूटिंग पर दोबारा लौटने लगे हैं। कंगना रनोट भी 7 महीने के ब्रेक के बाद शूटिंग शुरू करने जा रही हैं।
कंगना ने इस बात की जानकारी ट्विटर पर देते हुए लिखा, ''प्यारे दोस्तों आज बहुत ही खास दिन है, 7 महीने बाद दोबारा काम पर जा रही हूं, अपने बड़े प्रोजेक्ट 'थलाइवी' के लिए दक्षिण भारत जा रही हूं। इस महामारी के दौर में आप सबकी दुआओं की जरूरत है। मैं कुछ सेल्फी शेयर कर रही हूं जो कि उम्मीद है आपको पसंद आएंगी।'' कंगना ने लॉकडाउन का समय मनाली में काटा जहां उनका घर है।
जयललिता पर है फिल्म
'थलाइवी' फिल्म तमिलनाडु की पूर्व सीएम जे जयललिता की बायो ग्राफिकल फिल्म है जिसे हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषा में रिलीज किया जाएगा। कंगना इसमें जयललिता के किरदार में नजर आएंगी। इस किरदार के लिए कंगना ने अपना वजन 20 किलो तक बढ़ाया था।
##एएल विजय के निर्देशन में बन रही इस फिल्म की रिलीज डेट 26 जून, 2020 रखी गई थी मगर तय समय पर शूटिंग पूरी नहीं हो पाई। इस फिल्म की शूटिंग का एक शेड्यूल अभी बाकी है जिसके बाद ही इसे रिलीज करने का रास्ता साफ हो सकेगा।
ओटीटी पर रिलीज नहीं होगी फिल्म
एक इंटरव्यू मे ओटीटी और थिएटर रिलीज होने पर कंगना ने अपने विचार सामने रखे थे। उन्होंने कहा था, 'ये निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर ‘थलाइवी’ डिजिटली रिलीज नहीं हो सकती है क्योंकि ये एक बड़े स्तर की फिल्म है और ना ही ‘मणिकर्णिका’ डिजिटल स्पेस की फिल्म है। मगर हां ‘पंगा’ और ‘जजमेंटल है क्या’ भी दर्शकों को दिखाई गई थी। जिस तरह फिल्म बनाई गई थीं वो बहुत डिजिटल फ्रेंडली थीं। इन फिल्मों ने डिजिटल माध्यम से भी अच्छी रिकवरी की थी। तो इसलिए ये निर्भर करता है'।
एनसीबी की पूछताछ में ड्रग्स पैडलर्स ने बॉलीवुड के बड़े हीरो के नाम भी लिए हैं। ये हैं शाहरुख खान,अर्जुन रामपाल और डिनो मोरिया। बड़ी खबर ये है कि अर्जुन रामपाल शाहरुख को ड्रग्स सप्लाई करते रहे हैं। इस बात के सामने आते ही अर्जुन सुर्खियों में आ गए हैं। आइए जानते हैं उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ फैक्ट्स…
अर्जुन का जन्म 26 नवंबर, 1972 को जबलपुर में हुआ था। वह मिलिट्री बैकग्राउंड की फैमिली से ताल्लुक रखते हैं। उनके नाना ब्रिगेडियर गुरदयाल सिंह ने इंडियन आर्मी के लिए पहली आर्टिलरी गन बनाई थी।
माता-पिता का तब ही तलाक हो गया था जब अर्जुन बहुत छोटे थे। ऐसे में तलाक के बाद मां को अर्जुन की कस्टडी मिली जो कि एक टीचर थीं।
अर्जुन ने हिंदू कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है।
मॉडलिंग में कमाया नाम

बॉलीवुड में जगह बनाने से पहले अर्जुन सक्सेसफुल मॉडल थे। पॉपुलर फैशन डिज़ाइनर रोहित बल ने अर्जुन को एक पार्टी में देखा और उनके लुक्स देखकर काफी इम्प्रेस हो गए। उन्होंने अर्जुन के मॉडलिंग करियर को आगे बढ़ाने में मदद की।
1994 में अर्जुन को मॉडलिंग में सोसाइटी फेस ऑफ द ईयर अवॉर्ड मिला था।
2001 में अर्जुन ने फिल्म 'प्यार इश्क और मोहब्बत' से बॉलीवुड डेब्यू किया। इस फिल्म के लिए अर्जुन को कई डेब्यू अवॉर्ड्स मिले। 2008 में आई 'रॉक ऑन' के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
मोहब्बतें में काम कर चुकीं किम शर्मा अर्जुन की कजिन हैं।
2004 में आई 'लक्ष्य' के लिए अर्जुन रामपाल पहली पसंद थे लेकिन डेट्स ना होने के चलते वह यह फिल्म नहीं कर पाए और फिर ऋतिक रोशन इस फिल्म में कास्ट किए गए।
टॉप मॉडल से की शादी

अर्जुन ने 1998 में सुपरमॉडल मेहर जेसिया से शादी की। दोनों की दो बेटियां है: महिका और मायरा। महिका का जन्म 2002 में जबकि मायरा का जन्म 2005 में हुआ था। अर्जुन-मेहर की शादी 10 साल ही चली, 2018 में दोनों का तलाक हो गया।

तलाक के बाद अर्जुन साउथ अफ्रीकन मॉडल गैब्रियाला के साथ लिव इन रिलेशन में हैं। 18 जुलाई, 2019 को दोनों एक बेटे एरिक के माता-पिता बने हैं।
नहीं दिखा सके खास कमाल
अर्जुन अंतिम बार जेपी दत्ता की फिल्म पलटन में नजर आए थे जो कि 2018 को रिलीज हुई थी। उनकी अगली फिल्म नेल पॉलिश होगी जो कि 2021 में रिलीज होगी।
अर्जुन के करियर पर नजर डाली जाए तो मॉडलिंग में तो उन्होंने बहुत शोहरत हासिल की लेकिन 19 साल बॉलीवुड में गुजारने के बाद भी वह कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए।
'मोक्ष', 'दीवानापन', 'दिल का रिश्ता', 'असंभव', 'एक अजनबी' जैसी फिल्में फ्लॉप रहीं। 'रा.वन', 'हीरोइन', 'डी-डे', 'रॉय', 'डैडी' भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं दिखा सकीं।
सचिन देव बर्मन। भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री का वो नाम जिसकी तरह बनना हर किसी का सपना रहा है। त्रिपुरा राजघराने से ताल्लुक रखने वाले एसडी बर्मन साहब ने 1937 में शुरुआत तो बंगाली फिल्मों से की थी, लेकिन हिंदी फिल्मों में संगीत को उन्होंने नया मुकाम दिया। 100 से ज्यादा फिल्मों के म्यूजिक डायरेक्टर एसडी बर्मन साहब ने लता मंगेशकर से लेकर मोहम्मद रफी, किशोर कुमार से लेकर मुकेश तक हर किसी के करियर को सातवें आसमान पर पहुंचाया। बर्मन साहब जितने बेहतरीन संगीतकार थे, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प इंसान थे। उनके बारे में ऐसे कई किस्से हैं, जो आज भी फिल्मी दुनिया की हर शाम को खुशनुमा बना देते हैं।
सचिन देव बर्मन। भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री का वो नाम जिसकी तरह बनना हर किसी का सपना रहा है। त्रिपुरा राजघराने से ताल्लुक रखने वाले एसडी बर्मन साहब ने 1937 में शुरुआत तो बंगाली फिल्मों से की थी, लेकिन हिंदी फिल्मों में संगीत को उन्होंने नया मुकाम दिया। 100 से ज्यादा फिल्मों के म्यूजिक डायरेक्टर एसडी बर्मन साहब ने लता मंगेशकर से लेकर मोहम्मद रफी, किशोर कुमार से लेकर मुकेश तक हर किसी के करियर को सातवें आसमान पर पहुंचाया। बर्मन साहब जितने बेहतरीन संगीतकार थे, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प इंसान थे। उनके बारे में ऐसे कई किस्से हैं, जो आज भी फिल्मी दुनिया की हर शाम को खुशनुमा बना देते हैं।

बंगाल प्रेजिडेंसी में 1 अक्टूबर 1906 को पैदा हुए एसडी बर्मन की मां राजकुमारी निर्मला देवी थीं। वह मणिपुर की राजकुारी थीं, जबकि उनके पिता एमआरएन देव बर्मन त्रिपुरा के महाराज के बेटे थे। सचिन देव बर्मन 9 भाई-बहन थे। पांच भाइयों में वह सबसे छोटे थे। यह दिलचस्प है कि राजघराने से ताल्लुक रखने के बावजूद सचिन देव बर्मन के कंजूसी के किस्से पूरी इंडस्ट्री में मशहूर हैं। यही नहीं, वह नाराज भी जल्दी हो जाते थे और पलभर में ही नाराजगी दूर भी हो जाती थी।

एसडी बर्मन खर्च नहीं करते थे। इसलिए उन्हें इंडस्ट्री में बहुत से लोग कंजूस कहते थे। लेकिन उन्हें खाने-पीने का भी उतना ही शौक था। फुटबॉल उन्हें बहुत पसंद था। बताया जाता है कि एक बार जब मोहन बगान की टीम हार गई तो उन्होंने गुरुदत्त से कहा कि आज वह खुशी का गीत नहीं बना सकते हैं। कोई दुख वाला गीत है तो बनवा लो।

अभिमान, ज्वेल थीफ, गाइड, प्यासा, बंदनी, सुजाता, टैक्सी ड्राइवर जैसी फिल्मों में ऐतिहासिक संगीत देने वाले एसडी बर्मन ने म्यूजिक इंडस्ट्री में सितारवादन के साथ कदम रखा था। कोलकाता यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद वह 1932 में कलकत्ता रेडियो स्टेशन पर गायक के तौर जुड़े।

एसडी बर्मन साहब का मजाकिया अंदाज खास मशहूर रहा है। उनके बेटे आरडी बर्मन की बायोग्राफी में खगेश देव बर्मन ने लिखा है, 'मंदिर में घुसने से पहले सचिन देव बर्मन साहब जूते या चप्पल की जोड़ी एकसाथ नहीं रखते थे। वह एक चप्पल कहीं तो दूसरी चप्पल कहीं और रखते थे। जब उनसे किसी ने इसके बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया- आजकल चप्पल चोरी की वारदात बढ़ गई हैं। इस पर उनके साथी ने पूछा कि यदि चोर ने चप्पल के ढेर में से दूसरी चप्पी भी निकाल ली तो? इस पर एसडी बर्मन ने जवाब दिया कि यदि चोर इतनी मेहनत करता है, तो वह वाकई इसे पाने का हकदार है।'

एसडी बर्मन और साहिर लुधियानवी के बीच हुई अनबन भी इंडस्ट्री में बहुत मशहूर है। गुरु दत्त अपनी फिल्म 'प्यासा' बना रहे थे। इस अनबन की वजह थी गाने का क्रेडिट किसे मिले। एसडी बर्मन के जीवन पर किताब लिखने वाली लेखिका सत्या सरन ने एक इंटरव्यू में बताया, 'यह मामला इतना बढ़ गया था कि साहिर लुधियानवी ने सचिनदेव बर्मन से कहा कि वह एक रुपये अधिक फीस चाहते हैं। इस जिद के पीछे साहिर का तर्क यह था कि एसडी के संगीत की लोकप्रियता में उनका बराबर का हाथ था। एसडी बर्म ने शर्त को मानने से इनकार कर दिया और फिर दोनों ने कभी साथ में काम नहीं किया।'

एसडी बर्मन साहब का लता मंगेशकर से भी झगड़ा हुआ था। एक बार रेडियो इंटरव्यू में लता जी ने कहा, 'हमारी अनबन 1958 की फिल्म 'सितारों से आगे' के एक गीत को लेकर हुई थी। मैंने 'पग ठुमक चलत...' गीत रिकॉर्ड किया तो पंचम दा बहुत खुश हुए और इसे ओके कर दिया। लेकिन बर्मन साहब परफेक्शनिस्ट थे। उन्होंने मुझे फोन किया कि वो इस गीत की दोबारा रिकॉर्डिग करना चाहते हैं। मैं कहीं बाहर जा रही थी, इसलिए मैंने मना कर दिया। बर्मन साहब इस पर नाराज हो गए। इसके बाद कई साल तक हम दोनों ने साथ में काम नहीं किया।'

लता और सचिन देव बर्मन की इस अनबन को उनके बेटे आरडी बर्मन यानी पंचम दा ने ही सुलझाया था। चार साल बाद 1962 में जब राहुल देव बर्मन अपनी फिल्म 'छोटे नवाब' का म्यूजिक कंपोज कर रहे थे, तब उन्होंने पिता एसडी बर्मन से कहा कि म्यूजिक डायरेक्टर के तौर पर वह अपनी पहली फिल्म में लता दीदी से गाना गवाना चाहते हैं। इसके बाद दोनों बाप-बेटे में काफी देर बातचीत हुई और आखिरकार एसडी बर्मन मान गए।

यह बात भी दिलचस्प है कि महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का नाम भी एसडी बर्मन के ही कारण पड़ा है। दरअसल, सचिन तेंदुलकर के दादा सचिन देव बर्मन के बहुत बड़े फैन थे। उन्होंने ही प्रेरित होकर अपने पोते का नाम सचिन तेंदुलकर रखा था। सचिन देव बर्मन की याद में त्रिपुरा सरकार हर साल सचिन देव बर्मन मेमोरियल अवॉर्ड भी देती है। 31 अक्टूबर 1975 को एसडीबर्मन साहब का निधन हो गया। साल 2007 में एसडी बर्मन की याद में सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया।