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बॉलीवुड डेस्क. महात्मा गांधी और सिनेमा का गहरा नाता है। उनकी जिंदगी पर अब तक कई फ़िल्में बन चुकी हैं, जिनके जरिए उनके विचारों को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। बापू की 150वीं जयंती पर फिल्मों में उनका किरदार निभा चुके तीन एक्टर्स ने दैनिक भास्कर के साथ अपने अनुभव शेयर किए।
जब कई लोग मुझे एक छोटा-मोटा कॉमेडियन मानते थे, तब फिल्म निर्माता, केतन मेहता ने मुझे गांधी का किरदार निभाने के लिए चुना। मैंने अपनी योग्यता साबित की और उन्हें कभी निराश नहीं किया। राष्ट्रपति भवन में शूटिंग, नालंदा सुइट (जहां इंग्लैंड के राजकुमार चार्ल्स और राजकुमारी डायना रुके थे) में मेरा मेकअप करना। मेरे सिर को उसी तकिए पर टिका दिया था, जिसे बापू इस्तेमाल करते थे। कम से कम 10,000 लोग और 10 कैमरों के बीच शूटिंग करना आसान नहीं था। इस फिल्म की शूटिंग का अनुभव बड़ा ही रोमांचक और ज्ञानवर्धक था।
मैंने कभी किसी अन्य अभिनेता को गांधी की भूमिका निभाते हुए नहीं देखा। गांधीजी प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, जिन्हें साहित्य, तस्वीरों और ऑडियो-विजुअल फिल्मों में बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया गया है। मैंने उसी अध्ययन के आधार पर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ इस किरदार को निभाया था। हर भूमिका एक कलाकार के लिए बहुत स्पेशल होती है। मैं उन पलों के लिए शुद्धिकरण से गुज़रा हूं, लेकिन अब महसूस करता हूं कि किसी भी राजनीतिक व्यक्ति पर अंधा विश्वास एक बड़ा दोष हो सकता है।

मैंने उनकी मुद्राओं, इशारों, और चाल पर ध्यान केंद्रित किया था। सबसे ज्यादा मेहनत की थी भाषा पर, क्योंकि मुझे हिंदी और कुछ गुजराती एक्सेंट में बोलना था। उनके भाषण सुने। 'श' और 'स' के बीच ध्वनि उत्पन्न करने के लिए मेहनत की है। अंग्रेजी डबिंग के दौरान, मैंने उसी पैटर्न का उपयोग किया। हालांकि निर्देशक की पत्नी मुझसे उचित अंग्रेजी बुलवाना चाहती थीं, इसलिए मैंने दोनों सैम्पल्स को डब किया। अंत में वे आश्वस्त थे और मुझे अपने तरीके से डब करने की अनुमति दे दी गई।
अहिंसा, करुणा और शांति के असली प्रेषक बुद्ध व महावीर थे। गांधी इन प्रबुद्ध आत्माओं से प्रेरित थे। आम लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए हमेशा किसी न किसी की आवश्यकता होती है। गांधीजी अच्छे थे, लेकिन अच्छे व्यक्ति की हर बात देश की प्रगति के लिए कल्याणकारी हो यह जरूरी नहीं।
गांधीजी का किरदार निभाना मुझ पर बड़ी जिम्मेदारी थी। लेकिन उसे बोझ मानकर चलता तब सही तरह से किरदार निभा ही नहीं पाता। श्याम बेनेगल जी ने भी मुझसे कहा कि यह सब सोचना ही मत। लोग तो हर स्थिति में तुलना करेंगे। तब मैंने सभी बातों को अपने मन से निकाल दिया और पूरा फोकस किरदार पर कर दिया।
गांधीजी का किरदार निभाने से पहले श्याम बेनेगल जी ने मुझे पढ़ने के लिए 'माय एक्सपेरिमेंट विद ट्रुथ' किताब दी, जो गांधी जी ने लिखी है। यह किताब मेरे लिए एक तरह से गीता बन गई। बेनेगल ने कहा कि इसे पढ़ो और समझो। मैंने इसी किताब से अभ्यास किया। इसमें गांधीजी के जीवन की कई निजी बातें लिखी गई हैं। कुछ फिल्म में हैं, कुछ नहीं है। लेकिन इससे उनके संकल्प और जीवन को जानना मेरे लिए बड़ी बात रही।

गांधीजी का किरदार निभाने के बाद मुझे लगता है कि मेरी संकल्प शक्ति बढ़ गई। चीजों की तरफ मेरी जो दृढ़ता है, वह और ज्यादा हो गई है। मनोवृत्ति की मजबूती अब ज्यादा अटल होने लगी है। शायद किरदार को निभाने के साथ-साथ उसकी कुछ चीजें आप ले जाते हैं।
फिल्म में मेरे कॉस्ट्यूम, बाल आदि को लेकर पांच गेटअप थे। लेकिन अंत में जब मुझे अपना सिर मुंडवाना पड़ा, तो रोल यादगार बन गया। जब धोती-कुर्ता पहन वैनिटी से निकलकर कैमरे के सामने आया तो एक बारगी सेट पर मौजूद सभी लोग खड़े हो गए। उनको लगा कि गांधीजी की आत्मा मेरे अंदर आ गई है। दो मिनट के लिए एकदम सन्नाटा छा गया। यह अनुभव यादगार रहा।
पहले स्टेज पर 'महात्मा वर्सेस गांधी' में गांधीजी का रोल निभा चुका था। उसके दो-तीन साल बाद फिल्म 'गांधी माय फादर' में गांधीजी का रोल निभाने का अवसर मिला। यह रोल मिला तो अच्छा लगा। इतनी बड़ी हस्ती का किरदार जब निभाते हैं, तब एक इंसान होने के नाते बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में खुद के जीवन पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गांधीजी का किरदार निभाने के बाद मेरी कोशिश यही रहती है कि जो कुछ करूं पूरी निष्ठा और निडरता के साथ करूं।
गांधीजी बहुत दुबले-पतले थे तो मुझे इसके लिए डाइटिंग करनी पड़ी। एक दिन शूटिंग के दौरान मैंने सुबह से कुछ खाया नहीं था। साउंड रिकॉर्ड करने के लिए मेरे पेट के पास ही माइक लगा था। पेट में से आ रही गुड़-गुड़ की आवाज उसमें जा रही थी। यह सुनकर ऑस्कर विनिंग साउंड रिकॉर्डिस्ट रसूल पुकुट्टी परेशान हो उठे कि आखिर यह आवाज कहां से आ रही है। खैर जब उन्हें पता चला कि आवाज मेरे पेट से आ रही है तो शूटिंग रोक कर मुझे एक सेव खिलाया गया।

मुझे गांधी जी के गेटअप में आने के लिए 3 घंटे लगते थे। प्रोस्थेटिक्स से लेकर बाल्ड बिग आदि लगाना पड़ता था। स्क्रीन पर उनकी तरह हाव-भाव लाने का बहुत प्रयास किया। योग एक्सरसाइज़ आदि भी किया। उनकी हाइट कुछ 5.5 इंच रही होगी मेरी हाइट 5.1 इंच है, इसका भी ध्यान रखना पड़ा।
टीवी डेस्क (किरण जैन). अमिताभ बच्चन का कहना है कि उनका सरनेम (बच्चन) किसी भी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने यह बात 'कौन बनेगा करोड़पति' के करमवीर एपिसोड की शूटिंग के दौरान कही, जो महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर को टेलीकास्ट होगा। यह एपिसोड गांधीजी के फॉलोअर डॉ. बिंदेश्वर पाठक और दो साल से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीत रहे इंदौर के नगर निगम कमिश्नर आशीष सिंह के साथ शूट किया गया। अमिताभ ने शूटिंग के दौरान कई रोचक खुलासे किए।
अमिताभ ने 'केबीसी' के सेट पर बताया, "मेरा सरनेम बच्चन किसी धर्म से नहीं है। क्योंकि बाबूजी धर्म और जाति के खिलाफ थे। पहले हमारे परिवार का सरनेम श्रीवास्तव था। मुझे यह कहते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि 'बच्चन' सरनेम को इस्तेमाल करने वाला मैं परिवार का पहला व्यक्ति हूं। जब मैं किंडरगार्टन में प्रवेश ले रहा था, तब बाबूजी से मेरा सरनेम पूछा गया तो अपने तखल्लुस (उपनाम) को परिवार का सरनेम बनाने का फैसला लिया। जब जनगणना करने वाले आते हैं और मुझसे मेरा धर्म पूछते हैं तो मैं हमेशा जवाब देता हूं कि मैं किसी धर्म से नहीं हूं, मैं भारतीय हूं।"
शूटिंग के दौरान जब बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि शौचालय साफ करने वालों के लिए कोई सम्मान नहीं मिलना चिंताजनक बात है। तब अमिताभ ने बाबूजी से जुड़ा रोचक किस्सा शेयर किया। उन्होंने कहा, "मैं बताना चाहता हूं कि बाबूजी अपने आसपास के लोगों का बहुत सम्मान करते थे। होली से जुड़ी हमारी एक परम्परा थी कि हर व्यक्ति सबसे बड़े और सम्मानित व्यक्ति के पैरों पर रंग डालकर इस त्योहार की शुरुआत करता था। बाबूजी उस इंसान के पैरों में रंग डालते थे, जिसने उत्सव की शुरुआत से पहले शौचालय साफ किया हो।"
बिंदेश्वर को स्वच्छता का संकल्प लेते हुए सुलभ शौचालय नाम की मुहिम छेड़ने के लिए जाना जाता है। वे अब तक देश के 1749 शहरों में करीब 9500 पे एंड यूज शौचालयों का निर्माण कराया है और उनकी मुहिम के चलते 15 लाख से ज्यादा घरों में शौचालय बन चुके हैं।
बॉलीवुड डेस्क.विद्या बालन और सान्या मल्होत्रा ने ह्यूमन कम्प्यूटर शकुंतला देवी की लाइफ पर बन रही बायोपिक की तैयारी शुरू कर दी है। सितम्बर 2019 में इस फिल्म से विद्या बालन का फर्स्ट लुक रिलीज हुआ था। अबुंदन्तिया एंटरटेनमेंट ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस रीडिंग सेशन की तस्वीरें शेयर की हैं। फिल्म में सान्या, शकुंतला देवी की बेटी अनुपमा बैनर्जी के रोल में नजर आएंगी।
कैसे नाम पड़ा ह्यूमन कम्प्यूटर: 1977 में डलास यूनिविर्सटी में शकुंतला का मुकाबलाकम्प्यूटर ‘यूनीवैक’ से हुआ। शकुंतला को गणना करके 201 अंकों की एक संख्या का 23वां मूल निकालना था। इसे हल करने में उन्हें 50 सेकंड लगे। वहीं ‘यूनीवैक’ ने इसके लिए 62 सेकंड का समय लिया। इसके बाद से दुनियाभर में शकुंतला को ह्यूमन कम्प्यूटर के नाम से जाना जाने लगा।
कौन थीं शकुंतला देवी : शकुंतला देवी मैथ्स जीनियस के तौर पर जानी जाती थीं। गणित पर धाकड़ पकड़ के चलते उनका नाम 1982 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ था। उन्होंने कई किताबें भी लिखीं जिसमें नॉवेल, मैथ्स पर बेस्ड बुक्स, पजल और एस्ट्राेलॉजी बुक्स भी शामिल हैं। उनकी किताब ‘द वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुअल्स’ को भारत में होमोसेक्सुअलिटी पर बेस्ड पहली स्टडी के तौर पर लिया जाता है।
ऑल वूमेन टीम :इस फिल्म का निर्देशन अनु मेनन कर रही हैं और इसका स्क्रीनप्ले उन्होंने नयनिका महतानी के साथ मिलकर लिखा है। वहीं फिल्म की डायलॉग राइटर इशिता मोइत्रा हैं। एक तरह से देखा जाए तो यह संभवत: पहली ऐसी हिंदी फिल्म है, जिसमें डायरेक्शन से लेकर राइटिंग और मेन लीड तक की कमान महिलाओं के हाथों में हैं।
बॉलीवुड डेस्क. फिल्म 'बाहुबली' के भल्लालदेव यानी राणा दग्गुबती ने सोशल मीडिया पर एक प्रमोशनल पोस्ट शेयर की है, जिसमें वे काफी कमजोर नजर आ रहे हैं। उनकी हालत देख सोशल मीडिया पर एक्टिव उनके फैन्स ने चिंता जाहिर की है। एक यूजर ने उनसे सवाल किया है, "सर क्या हुआ? आप इतने दुबले क्यों दिख रहे हो? एक अन्य यूजर का कमेंट है, "आप कैसे हैं? सब कुछ ठीक है न?" एक यूजर का कमेंट है, "आपको क्या हुआ? इतने स्किनी क्यों दिख रहे हो? आपको इस हाल में देखकर डर लग रहा है।" कई लोग तो उनके जल्दी ठीक होने की दुआ भी मांग रहे हैं।


फिल्म के लिए राणा ने घटाया है वजन
रिपोर्ट्स की मानें तो राणा के दुबले होने की वजह कोई बीमारी नहीं, बल्कि उनकी अपकमिंग फिल्म है। बताया जा रहा है कि वे इन दिनों साई पल्लवी के साथ तेलुगु फिल्म 'विराटा प्रवम 1992' की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अपना वजन कई किलो कम किया है। फिल्म की शूटिंग जून में शुरू हो चुकी है।
'विराटा प्रवम' के अलावा राणा ने हाल ही में 'हाथी मेरे साथी' की शूटिंग पूरी की है, जिसमें वे बनदेव की भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म तमिल, तेलुगु और हिंदी में रिलीज होगी। उनकी अन्य अपकमिंग हिंदी फिल्मों में 'हाउसफुल 4' और 'भुज : द प्राइड ऑफ इंडिया' शामिल हैं।